Tuesday, April 7, 2020

आरती माँ लक्ष्मीजी।

 आरती माँ लक्ष्मीजी।

Download Mata Rani Images Hd Wallpaper - Laxmi Mata Photo Download ...



ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

दुर्गा रुप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्‍गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥





आरती: श्री हनुमान जी


आरती: श्री हनुमान जी 




आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जाके बल से गिरवर काँपे ।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥

लंका जारि असुर संहारे ।
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥

पैठि पताल तोरि जाग कारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर संहारे ।
दाईं भुजा सब संत उबारें ॥

सुर नर मुनि जन आरती उतरें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कचंन थाल कपूर की बाती ।
आरती करत अंजनी माई ॥

जो हनुमानजी की आरती गावे ।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥





आरती: श्री बांके बिहारी

 आरती: श्री बांके बिहारी


Fresh God Radha Krishna Photos | High Definition Wallpapers


श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं,
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं ।
आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं,
श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी...॥

मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे,
प्यारी बंसी मेरो मन मोहे ।
देख छवि बलिहारी मैं जाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी...॥

चरणों से निकली गंगा प्यारी,
जिसने सारी दुनिया तारी ।
मैं उन चरणों के दर्शन पाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी...॥

दास अनाथ के नाथ आप हो,
दुःख सुख जीवन प्यारे साथ आप हो ।
हरी चरणों में शीश झुकाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी...॥

श्री हरीदास के प्यारे तुम हो।
मेरे मोहन जीवन धन हो।
देख युगल छवि बलि बलि जाऊं।
॥ श्री बांके बिहारी...॥

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं,
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं।
आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं,
श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं।





आरती कुंजबिहारी की।

आरती कुंजबिहारी की॥

 

God Krishna Hd Wallpaper Download , (38+) Pictures


आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती: तुलसी महारानी।

आरती: तुलसी महारानी।

Tulsi Mata तुलसी माता | Tulsi pot, Tulsi, Tulsi vivah

तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो ।

धन तुलसी पूरण तप कीनो,
शालिग्राम बनी पटरानी ।
जाके पत्र मंजरी कोमल,
श्रीपति कमल चरण लपटानी ॥

धूप-दीप-नवैद्य आरती,
पुष्पन की वर्षा बरसानी ।
छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन,
बिन तुलसी हरि एक ना मानी ॥

सभी सखी मैया तेरो यश गावें,
भक्तिदान दीजै महारानी ।
नमो-नमो तुलसी महारानी,
तुलसी महारानी नमो-नमो ॥

तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो ।

https://aasthasagar.blogspot.com/2020/04/blog-post_11.html

श्री बृहस्पति देव की आरती

॥ श्री बृहस्पति देव की आरती ॥


बृहस्पतिवार व्रत कथा | Brihaspativar Vrat Katha ...


ऊँ जय वृहस्पति देवा, ऊँ जय वृहस्पति देवा।
छिन छिन भोग लगा‌ऊँ, कदली फल मेवा॥
॥ ऊँ जय वृहस्पति देवा...॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी॥
॥ ऊँ जय वृहस्पति देवा...॥

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता॥
॥ ऊँ जय वृहस्पति देवा...॥

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े॥
॥ ऊँ जय वृहस्पति देवा...॥

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी॥
॥ ऊँ जय वृहस्पति देवा...॥

सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो।
विषय विकार मिटा‌ओ, संतन सुखकारी॥
॥ ऊँ जय वृहस्पति देवा...॥

जो को‌ई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे॥
॥ ऊँ जय वृहस्पति देवा...॥

सब बोलो विष्णु भगवान की जय।
बोलो वृहस्पतिदेव भगवान की जय॥






आरती सन्तोषी माता


  आरती सन्तोषी माता


Santoshi Maa | Maa wallpaper, Wallpaper free download, Maa image

जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता।
अपने सेवक जन की सुख सम्पति दाता ॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

सुन्दर चीर सुनहरी मां धारण कीन्हो।
हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

गेरू लाल छटा छबि बदन कमल सोहे।
मंद हंसत करुणामयी, त्रिभुवन जन मोहे॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

स्वर्ण सिंहासन बैठी चंवर दुरे प्यारे।
धूप, दीप, मधु, मेवा, भोज धरे न्यारे॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

गुड़ अरु चना परम प्रिय तामें संतोष कियो।
संतोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

शुक्रवार प्रिय मानत आज दिवस सोही।
भक्त मंडली छाई, कथा सुनत मोही॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

मंदिर जग मग ज्योति मंगल ध्वनि छाई।
विनय करें हम सेवक, चरनन सिर नाई॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

भक्ति भावमय पूजा अंगीकृत कीजै।
जो मन बसे हमारे, इच्छित फल दीजै॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

दुखी दारिद्री रोगी संकट मुक्त किए।
बहु धन धान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिए॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

ध्यान धरे जो तेरा वांछित फल पायो।
पूजा कथा श्रवण कर, घर आनन्द आयो॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

चरण गहे की लज्जा रखियो जगदम्बे।
संकट तू ही निवारे, दयामयी अम्बे॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

सन्तोषी माता की आरती जो कोई जन गावे।
रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति, जी भर के पावे॥
॥ जय सन्तोषी माता...॥

जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता।
अपने सेवक जन की सुख सम्पति दाता॥